देखिए! 90 साल की दादी ने 13 हजार फीट की उंचाई से लगाई छलांग, कर दिया सबको हैरान।

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Bindaas Dekh


यूं तो आपने बहुत से ऐसे हैरान-परेशान कर देने वाले हैरतअंगेज कारनामों के बारे में देखा और सुना होगा जैसे-ऊंचे बर्फीले पहाडों में राइडिंग, ऊंची-ऊंची इमारतों व पहाड़ों के बीच बंधी रस्सी पर चलना, बाइक स्टंट, गहरे पानी में बिना सांस लिए रहना, बिल्डिंग पर सीधे चढना व स्केटिंग करना, लेकिन इन सभी के लिए किसी इंसान का स्वस्थ व दिलों-दिमांग से मबजूत होना बहुत मायने रखता है। वही ज्यादातर इस तरह कारनामें को लेकर आज के युवाओं में ज्यादा जोश होता है। वे ज्यादातर इसे अपने शौक  और खेल के रूप में लेते है। वही कुछ लोगों के   ये ड्रीम होता है। हम आपकों एक ऐसे ही हैरान कर देने वाले कारनामे के बारे में बताने जा रहे है जिन्होनें उम्र के एक ऐसे पड़ाव पर आकर इस तरह का कारनामा कर दिखाया जिसे करने की शायद ही कोई सोच सकता है।
90 वर्षीय एमी ब्रिटेन के किंग्सटन में अपने परिवार के साथ रहती थी। उनके परिवार में उनके पति, बेटी और पौते थे। एमी बहुत ही खुशमीजाज किस्म की महिला थी और नेचर उन्हें बहुत पसंद था। एमी जब भी खुले आसमान में उड़ते पंछियों को देखती थी तो उनका भी मन करता था कि काश वो भी इनकी तरह खुले आसमान में उड़ सकती। लेकिन उनके पति को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था। वर्ष 2015 में एमी की 56 साल की बेटी ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो गई। उन्होने लंदन के रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी हॉस्पीटल में उसका इलाज कराया और वह सफल भी रहा। वह अस्पताल की बहुत ही शुक्रगुजार थी कि उन्होंने उनकी बेटी को नई जिंदगी दी। सब खुश थे। कुछ समय बाद एमी के पौते ने स्काय डाइविंग की। इससे वे बहुत प्रेरित हुई और उन्होने खुद को एक मौका देने की ठान ली और आखिरकार वह दिन आ ही गया। उन्होने 8 अगस्त को अपने जन्मदिन के अवसर पर स्काय डाइविंग करने का मन बना लिया। उन्हे पैराशूट पहनकर विमान से कूदना था। स्काय डाइविंग की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थी, परिवार के सभी सदस्य डरे हुए लग रहे थे। कुछ ने एमी का हौसला भी बढाया। एमी को विमान के जरिये 13 हजार फीट ऊंचा ले जाया गया। अपने अनुभव सांझा करते एमी ने बताया कि यह अनुभव वह कभी भूल नहीं पाऐंगी। जब वह विमान कूदी तो हवा बहुत तेज थी, वे धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रही थी। खुले आसमान के उस अदभूत नजारे का उन्होने खूब आनंद उठाया। इस स्काय डाइविंग के लिए एमी को पुरस्कार राशि भी मिली जो उन्होने रॉयल मार्सडेन कैसर चैरिटी हॉस्पीटल को दे दी, जहां उनकी बेटी का इलाज हुआ था। उनकी बेटी को अस्पताल का इस तरह से शुक्रिया करने का अंदाज बहुत पसंद आया।
आज भी इंसान के मन में यह सवाल उठता है कि क्या महिलाएं शारीरिक व मानसिक रूप से सच में मजबूत है ? लेकिन कुछ सालों में यह सब बदला है आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं, जहां महिलएं न हो, कोई ऐसा काम नहीं जो वो नहीं कर सकती हो।

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